सुखासन की विधि और लाभ

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सुखासन का शाब्दिक अर्थ होता है सुख देने वाला आसन। जब भी हम इस आसन को करते हैं, तो सच में ही हमें आत्मीय शांति और सुख की प्राप्ति होती है, यही कारण है कि हम इस आसन को सुखासन के नाम से जानते हैं। सुखासन बैठकर या फिर इसे पलथी मार कर किया जाने वाला आसन होता है, लेकिन आज समय कुछ ऐसा है कि हमारे पास पलथी मारकर बैठने का समय नहीं है। प्राचीन समय में लोग पलथी मारकर खाना खाते थे। लेकिन अब समय कुछ ऐसा है जिसमें लोग नीचे बैठकर खाना नहीं खाते बल्कि डायनिग टेवल पर बैठकर ही खाना खाते हैं। आज के समय में व्यक्ति जितना सुखी है, उतना ही वह बीमारियों से ग्रसित है, लेकिन जब हम आसन करते हैं तब हमारे शरीर को होने वाली बीमारियों से काफी हद तक बच सकते हैं।

सुखासन की विधि ( Sukhasana Steps ) :
सुखासन अर्थात सुख देने वाला आसन। आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई तनाव से ग्रस्त है, जिसके कारण उसका स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है, ऐसे में जब हम मन की शांति चाहते हैं तो सुखासन इसके लिए बहुत ही फायदेमंद साबित होता है सुखासन को किस प्रकार से किया जाता है इस बारे में बात करते हैं…

  • सुखासन को करने के लिए सबसे पहले जमीन पर चटाई या दरी बिछा लें।
  • अपने दोनों पैरों को सामने और सीधे रखें।
  • अपने एक पैर की एड़ी अपने दूसरे पैर की जंघा के नीचे रखें फिर दूसरे पैर की एड़ी को भी इसी प्रकार से रखें। ऐसा करके आप पलथी में आ जाओगे।
  • अपनी पीठ और मेरुदंड को बिल्कुल सीधा रखें। इस बात पर ध्यान दे की आप अधिक झुके हुए न हो।
  • अपने कंधों को ढीला छोड़ते हुए अपनी सांस को पहले अंदर की ओर ले फिर बाहर की ओर छोड़ें।
  • अपनी हथेलियों को एक के ऊपर एक करके अपनी पलथी के ऊपर रखें।
  • अपने सिर को ऊपर उठाते हुए अपनी दोनों आखों को बंद कर लें।
  • अपना पूरा ध्यान अपनी श्वास क्रिया पर लगाते हुए सांस लम्बी और गहरी लें।
  • अगर आप इसे पहली बार कर रहे हो, तो आपको कठनाई महसूस हो सकती है। आप किसी दीवार का सहारा लेकर इसको कर सकते हो।

सुखासन करने के लाभ ( Sukhasana Benefits ) :

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  • जब भी हम इस अभ्यास को नियमित रूप से करते हैं, तो हमें मानसिक सुख और शांति का अनुभव होता है।
  • यदि आप चिंता, अवसाद या फिर क्रोध से ग्रस्त हैं, तो आप को सुखासन को करना चाहिए, क्योंकि इसे करने से आप को बहुत ही लाभ मिलता है।
  • इस आसन को करने से हमारी बैठने की सही आदत बन जाती है।
  • यह आसन हमारे मन की चंचलता को कम करने में सहायक होता है।
  • इस आसन को करने से हमारी रीढ़ की हड्डी में होने वाली रोगों से निजात मिलती है।
  • जब भी हम सुखासन को करते हैं तो हमारा चित शांत और मन एकाग्रस्त होता है।

सुखासन सावधानियां ( Sukhasana Precautions )

  • जिन लोगों के घुटनों में दर्द है उन्हें ये आसन नहीं करना चाहिए। अगर करना हो तो किसी एक्सपर्ट की निगरानी में करना चाहिए।
  • अगर आप की रीढ़ की चोट लगी हुई हो, तो आप को इस आसन को बहुत ही ध्यान पूर्वक करना चाहिए और आप को लम्बें समय तक नहीं बैठना चाहिए।
  • अपने शरीर की प्रकिया को समझकर उसके अनुरूप आसन को करना चाहिए।
  • इस आसन को एकांत में करना चाहिए और अगर आप इसे अध्यात्मिक रूप से कर रहे हो तो आप को पूर्व या उत्तर दिशा की और मुख करके इस आसन को करना चाहिए।
  • Source : SehatGyan
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