..तो इस कारण भी नींद होती है प्रभावित

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कहा जाता है कि कब किसकी कैसे नीद उड़ जाए पता नहीं होता है। कभी किसी को तनाव में नींद नहीं आती है तो किसी को किसी समस्या के कारण नींद नहीं आती है। लेकिन एक एक शोध में ये बात सामने आई कि सामाजिक दवाब के कारण भी हमें नींद नहीं आती है। जो कि अपने आप पर एक चौकानें वाली बात है।

इस शोध के अनुसार शोधकर्ताओ ने यह निष्कर्ष निकाला कि सामाजिक दबाव लोगों को जरूरत से कम नींद लेने पर मजबूर कर रहा है। इससे वैश्विक स्तर पर नींद के संकट का जोखिम बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों ने एक स्मार्टफोन एप के आंकड़ों से यह निष्कर्ष निकाला है।

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शोध के लिए मिशिगन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 100 देशों के कुल 6,000 लोगों के नींद के तरीकों का आंकलन किया। इस दौरान प्रतिभागियों की आयु, लिंग, रोजाना मिलने वाला प्राकृतिक प्रकाश तथा सांस्कृतिक दबावों का अध्ययन किया गया था।

अध्ययन के अनुसार नींद पर समााजिक प्रभाव की कुल मात्रा काफी हद तक स्पष्ट नहीं थी। शोध में पाया गया है कि नींद की कमी की समस्या अक्सर बिस्तर पर जाते वक्त आती है।

मध्यम आयु वर्ग के पुरुष सबसे अधिक नींद की कमी से जूझते पाए गए। उन्हें सात से आठ घंटे की नींद आम तौर से नहीं मिलती। शोध में बताया गया है कि नींद की कमी से मानव स्वास्थ्य पर काफी हानिकारक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

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